Thursday, April 9, 2020

।।सफर कुछ जाना पहचाना सा है।।

Writer & Director कहानीबाज Rajnish BaBa Mehta 

अनजाने रास्तों का है ये सफर, कुछ जाना पहचाना सा लगता है,
मिलने-बिछुड़ने की बात करता है, अपना घर सा ही लगता है।।
ना जाने किस मोड़ पर मुड़ती है हरसतें, हवाओं में कुछ उम्मीद सी लगती है,
पीछे जो छुट गई कई कहानियां, नए रास्तों पर थोड़ी गुमनाम सी लगती है।।

फैसला कई बरसों का था, जो ये रास्ता आज मिला,
सदियों से सोती हुई सड़कें,  हमारी हसरतों को जगा गया।।
खामोश ख्वाहिशें जो निकली है पुराने बंद दरवाजों से, 
मरते हुए मन, गिरते हुए जिस्म को ज़िंदा होना सिखा गया।।

ये हवाओं की सरसराहट, झुरमुटों का शोर, कुछ कह रहा है,
कहां खोए थे तुम, क्यों रोए थे तुम, क्या पाए थे तुम, भीड़ ही तो थे तुम ।। 
वो बेकाबू बेबाक मन, उम्मीदों का बोझ लिए बेचारा तन, कुछ बोल ना सका, 
फिर भी सोच की गहराईयों में खोए, सांसों औऱ धड़कनों के लिए ज़िदा हो तुम।

मिटा दो अब लिखी हुई सारी तकदीरें, तोड़ दो बंदिशों वाली जंजीरें,
गुजरते वक्त तले भूले-बिसरे किस्सों की अब कोई बात नहीं होगी ।।
जो खो गया उसकी फिक्र में जज्बातों की कोई ज़िक्र नहीं होगी, 
सन्नाटाओं का शोर है, फिर भी खुशियों तले हौसलों की  कभी हार नहीं होगी।।

#कहानीबाज
रजनीश बाबा मेहता 
#कहानीबाज Rajnish baba mehta 

कहानीबाज रजनीश बाबा मेहता 


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