

जगाओ ना बापू को नींद आ गई है
जगाओ न बापू को, नींद आ गई है
अभी उठके आये हैं।,बज़्म-ए-दुआ से वतन के लिये, लौ लगाके ख़ुदा से शमीम करहानीटपकती है रूहानियत सी फ़ज़ा सेचली जाती है, राम की धुन, हवा सेदुखी आत्मा, शान्ति पा गई है
जगाओ न बापू को, नींद आ गई है
ये घेरे है क्यों, रोने वालों की टोली ख़ुदारा सुनाओ न मन्हूस बोली भला कौन मारेग बापू को गोलीकोई बाप के ख़ूं से, खेलेगा होली ?अबस, मादर-ए-हिन्द, शरमा गई है
जगाओ न बापू को, नींद आ गई है
मोहब्बत के झण्डे को गाड़ा है उसनेचमन किसके दिल का, उजाड़ा है उसने ?गरेबान अपना ही फाड़ा है उसनेकिसी का भला क्या, बिगाड़ा है उसने ?उसे तो अदा, अम्न की भा गई है
जगाओ न बापू को, नींद आ गई है
अभी उठके खुद वो, बिठायेगा सबकोलतीफ़े सुनाकर, हंसायेगा सबकोसियासत के नुक़्ते बतायेगा सबकोनई रोशनी दिखायेगा सबकोदिलों पर सियाही सी क्यों छा गई है ?
जगाओ न बापू को, नींद आ गई है
वो सोयेगा क्यों, जो है सबको जगाताकभी मीठा सपना, नहीं उसको भातावो आज़ाद भारत का है, जन्म दाताउठेगा, न आंसू बहां, देस-माताउदासी ये क्यों, बाल बिखरा गई है
जगाओ न बापू को, नींद आ गई है
वो हक़ के लिए, तन के अड़ जाने वालानिशां की तरह, रन में गड़ जाने वालानिहत्था, हुकूमत से लड़ जाने वालाबसाने की धुन में, उजड़ जाने वालाबिना, ज़ुल्म की जिस्से,थर्रा गई है
जगाओ न बापू को, नींद आ गई है
वो उपवास वाला, वो उपकार वालावो आदर्श वाला , वो आधार वालावो अख़लाक़ वाला, वो किरदार वालावो मांझी, अहिन्सा की पतवार वालालगन जिसकी, साहिल का सुख पा गई है
जगाओ न बापू को, नींद आ गई है
कोई उसके ख़ू से, न दामन भरेगाबड़ा बोझ है, सर पर क्योंकर धरेगाचराग़ उसका दुशमन, जो गुल भी करेगाअमर है अमर, वो भला क्या मरेगाहयात उसकी,खुद मौत पर छा गई है ।
जगाओ ना बापू को, नींद आ गई है । - 2