![]() |
| Rajnish BaBa Mehta With Unique Instrument BAMHAM |
![]() | |
|
परिंदों की तरह उड़ना चाहता हूं मैं, उफनती नदियों की तरह बहना चाहता हूं मैं, लेकिन इंसानी जिंदगी में बहुत मुश्किलें है, लेकिन सोच लो तो क्या मुश्किल है, अगर मुश्किल है तो नामुमकिन नहीं । -------------------------- लिखना बगावत है औऱ मैं इस दुनिया का सबसे बड़ा बगावती । ---- क़ातिब रजनीश बाबा मेहता
![]() |
| Rajnish BaBa Mehta With Unique Instrument BAMHAM |
![]() | |
|
| Writer & Director Rajnish BaBa Mehta |
| Rajnish baba mehta |
| Rajnish BaBa Mehta |
![]() |
| तू या मैं ? |
अजनबी की तलाश में चलता रहाएक अजनबी की तलाश में चलता रहा
खामोश गलियों में तेरा इंतजार करता रहा
जहां टूटे हैं सपने...
वहां हाथों की लकीरों को देखे हैं अपने
कदमों तले रास्तों के फासलों का क्या पता
रकीबों के शहरों में अनजान बनकर चलता रहा
चांद की चांदनी तले रात रात भर
ख्वाबों की सूनी सड़कें नापता रहा
अब तो मंजिल का पता नहीं
फिर भी...
तेरी आगोश में सिमटने की ख्वाहिश से जीता रहा
ये मेरी भूल थी या तेरी आंखो की सरगोशियां
जो तेरे आंसूओं से भीगी काजल को पीता रहा
अब तो इंतजार की भी इंतहा हो गई
फिर भी
तेरी नशीली पलकों का इंतजार
बंद गलियों में किए जा रहा हूं।


एक पल के इंतजार में चलता जा रहा हूं मैं
अपनी आवाज को सुनने की चाहत में जिए जा रहा हूं मैं।
वो रहगुजर भी मेरे इंतजार में पलकें बिछाए बैठी है
जिसके आखिरी छोड़ पर मेरी मंजिल मेरे इंतजार में बैठी है।
अपने आप को ढूंढने की फिराक में हर पल गुम होता जा रहा हूं,
अब तो तुम्हारें आने का आसरा भी नही दिखता
फिर न जाने क्यों मैं शब्दों में गुम होता जा रहा हूं।
धीरे धीरे धुंधली पड़ती जा रही है तेरी यादें
अब तो शब्द ही जीने का सहारा बनता जा रहा है।
----रजनीश कुमार


किस्मत के धनी
Copyright